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मेरे अल्फाज़

मंजिलों का दौर

Ravindra Shrivastava

27 कविताएं

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मंजिलो का दौर आज से शुरू हुआ है,
ग़फ़लत में ज़िन्दगी हर बार हुआ है,
खुशियों का सेहरा सर चढ़ कर कर रहा बयां,
की कोई अक्स दिल पर अब राज कर रहा है...

कुछ खास होता है ज़ज़्बातों का दौर जीवन में,
उस सहमी सी छुअन का कुछ अलग ही है एहसास,
अठखेलियां का भी न होता जिनपे कोई जोर,
उन्हें महसूस कर दिल होता उनके ओर...

नादानियों से है गहरा वास्ता जिनका,
यही तो नाजुक डोर है जिससे बंध जाउ मैं,
पल पल ख़ुमारियों का कशिश बढ़ता है,
इसी उल्फत में जिंदिगी बस अब कटता है...

नज़ारे भी देखे तो दिल में हलचल होता है,
सुर्ख लालिमा से दिल का आंगन रंगीन होता है,
जब जब सोचे ये पागल दिल उनके बारे में,
कुछ अज़ीब सा महसूस दिल में होता है...

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