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मेरे अल्फाज़

आज़ाद हैं हम...

Ravindra Shrivastava

45 कविताएं

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आज़ाद हैं हम, आज़ाद है भारत हमारा,
वीर सपूतों नें जिसे बलिदानों से संवारा,
अदम्य साहस देख सीमाएं भी हर्षित है,
की दुश्मनों का इधर देखना भी वर्जित है...

याद आता है वो करुण दृश्य,
जब भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा था,
दबिश थी आजादी की हर दिल में,
जो आग की लपटों की भांति पसरा था...

धधकते ज्वाला को सीने में दबाया है,
वीर जवानों नें देश की सीमाओं को संभाला है,
नमन है वीर जवानों को हृदयतल से,
निज प्राण आहुति से हमें गुलामी से बचाया है...

आज हम अपनें मकानों में सुरक्षित है,
क्योंकि सीमाएं सैनिकों से परिलक्षित है,
आँख न उठा पाए कोई गैर मुल्क,
गर भूल के सोच ले, फिर वो असुरक्षित है..

मुझे गर्व है अपनें वीर सपूतों पर,
जो प्रहरी बन सीमाओं की हिफाज़त करते है,
कोटि कोटि वंदन है उन जाबांजों को,
देख जिसे दूसरे देश आंख उठाने से डरते है...

- रविन्द्र श्रीवास्तव "दीपक"
छपरा, बिहार
#AzadAlfaz
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