आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Jugnu

मेरे अल्फाज़

जुगनू

Ravinder kaur

16 कविताएं

410 Views
मैं हूं एक जुगनू
बांटूं प्रकाश
अंधकार में
करूं आकर्षित
टिमटिमा कर l

आलोकित करना है मुझे
कण-कण
पथभ्रष्टों को सही
मार्ग दिखाना है
हर मन को उज्ज्वल करना है
करना है स्वागत
प्रभात की प्रथम किरण का l

सूरज, चाँद, सितारे
और अनगिनत प्रकाश पुंज
सत्ता कितनी महान !
कितने अच्छे सारे
नहीं जानते
अंधकार की ओट में
जुर्म करना
औरों के जीवन दीप
बुझाकर छिप जाना
छोटा सा होकर भी
समझूं स्वयं को इनके जैसा
इन्हीं के परिवार का हिस्सा l

मैं हूं एक लघु जुगनू
फिर भी रखूं आशा बड़ी
तम की हर छाया
ग्रसने की l

- रवींद्र कौर

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!