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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

ravikant chaubey

1 कविता

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कुछ लोग अपनी ज़िंदगी खुद बनाये होते हैं,
वर्ना अक्सर लोग ज़िंदगी के बनाये होते हैं ।

ज़िंदगी क्या है, क्या बयाँ करेगा हर कोई,
पूछिये उनसे जो दर्द के आजमाए होते हैं ।

भीतर हर इंसा के कम या ज्यादा बदनीयती,
और बाहर,उपदेशों की दुकान सजाये होते हैं ।

सबब रातों का तारे गिनने का जानें वो,
जो शमां रात भर सिरहाने जलाये होते हैं ।

ज़िंदगी नहीं बदलती, बदल देती है हमें,
फिर भी, सब एक आस लगाए होते हैं ।


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