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Mohabbat ka chand

मेरे अल्फाज़

मोहब्बत का चाँद

Ravi Prakash

30 कविताएं

269 Views
कभी मुझको मोहब्बत का अनोखा चाँद दिखलाना,
कभी मैं रूठ गर जाऊँ तो तुम मुझको मना लेना,
मैं तेरी चाँदनी हूँ मैं जुड़ीं तेरी चमक से हूँ,
मगर मुशिकल है मेरे बिन तेरी पहचान बन पाना।
मोहब्बत में मनाना रूठना चलता रहे लेकिन,
मनाने रुठने से प्यार यूँ बढ़ता रहे लेकिन,
मगर तुम देखना ये रूठना न हद से बढ़ जाये,
कभी ऐसा मुक़ाम आये तो रिश्ता थाम तुम लेना।।
मोहब्बत मैं करूँ तुमसे या तो तुम इश्क़ फ़रमाओ,
कि हर लम्हा ज़रा थोड़ा मेरे नज़दीक आ जाओ,
करूँ कोशिश मिटे दूरी ये अपने दरमियानों में
कभी मैं दूर थोड़ा गर निकल जाऊँ बुला लेना।

- रवि श्रोत्रिय
   बरेली, उत्तर प्रदेश

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