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मेरे अल्फाज़

झूठ की परतों को फटने दो

Ratna Pandey

136 कविताएं

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झूठ की अनेकों तहों के अंदर, सच लपेटा जाता है,
जिव्हा से सच बोल ना पाए, मुंह दबाया जाता है,

बार बार, हर बार ही, जनता से उसे छुपाया जाता है,
बरगला कर भोले भाले लोगों को, झूठ परोसा जाता है,

नहीं है किसी में हिम्मत, जो झूठ का पर्दाफ़ाश करे,
जो सरेआम बोलते हैं झूठ, उनसे कोई सवाल करे,

धीरे-धीरे संभल रहा है देश, झूठ से उसे आज़ाद करें,
देशवासियों संभल जाओ, झूठों को नाकामयाब करें,

जकड़ी रही वर्षों तक भारत मां, गुलामी की ज़ंजीरों में,
ना जाने कितने ही शहीदों ने, उन ज़ंजीरों को तोड़ा है,

दशकों से पिछड़ रहा था सबसे, प्यारा हिंदुस्तान हमारा,
अब तो आगे बढ़ने दो, कदमों को रफ़्तार पकड़ने दो,

राजनीति को नेताओं ने, षडयंत्रों का रण बना रखा है,
झूठ फरेब और लूट का, केवल स्थान बनाकर रखा है,

है अगर देश से सच्चा प्यार, झूठ की परतों को फटने दो,
झूठ को जो जिताओगे, फिर कभी ऊपर उठ ना पाओगे ।

-रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)


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