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मेरे अल्फाज़

ये कौन सा जहान है?

Rashmi Singh

1 कविता

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हर तरफ़, हर शहर
जंग का समां है,
ये कौन सा जहान है,
ये कौन सा जहान है?

भूतकाल शर्मसार,
कृष्णपक्ष में भविष्य,
वर्तमान की न सुन रहा कोई पुकार है।
ये कौन सा जहान है,
ये कौन सा जहान है?

भावनायें शून्य हैं,
विचारधारा सड़ चुकी,
हर तरफ़ यहां वहां ख़ून के निशान हैं।
ये कौन सा जहान है,
ये कौन सा जहान है?



इसकी जात, उसका धर्म,
इसका देश, उसके कर्म,
मार काट में यहां निपुण सभी समाज हैं।
ये कौन सा जहान है,
ये कौन सा जहान है?

नफ़रतें हैं सबके सर,
ना फिक्र है, ना कोई डर,
शैतान ने है अब लिया नया कोई अवतार है
ये कौन सा जहान है,
ये कौन सा जहान है?

ये किस तरह की जीत है
लाशों पर टिकी हुई?
आत्मायें मर चुकीं
संवेदना गढ़ी हुईं
तमाशबीन बन विवश क्यों हो गया इन्सान है?
ये कौन सा जहान है,
ये कौन सा जहान है?

~ रश्मि।


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