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मेरे अल्फाज़

"शायद ही ....

Ranjeet Kumar

10 कविताएं

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जो फटी जेब लहराता है,
याज्ञोवपीत दिखलाता है,
हर बार चुनावों से थक कर,
लम्बी छुट्टी पर जाता है,
आलू से स्वर्ण बनाता है,
गेहूं के वृक्ष उगाता है,
वीरों की अंत्येष्टि पर,
मिथ्या शोक जताता है,
संसद जैसी भरी सभा में,
नैनों को मटकाता है,
लालच की पोटली दिखलाकर,
जनता को मूर्ख बनाता है,
ऐसे हाथों में सत्ता हो तो,
समझो राष्ट्र का नाश है,
न पूर्ण अभी विश्वाश है,
पूर्वानुमान नहीं ख़ास है,
फिर भी मुझको एहसास है,
शायद ही पप्पू पास है।
-रंजीत कुमार चौरसिया 'अनुभव'


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