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मेरे अल्फाज़

सूरज नहीं आएगा

rameshwar Mishra

63 कविताएं

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क्या कह रहे हो
सच कह रहे हो
सूरज नहीं आएगा अब
इन कुत्सित अंधियारों तक

ऐसा नहीं सूरज को
भय है इनसे
किंतु कहना है सूरज का
नहीं उम्मीद हमें कुछ इनसे

यही दशा तो अंधकार
छँटे आखिर कैसे
जब सूरज ही कहता है
जाने दो, मत उलझो इनसे

-रामेश्वर मिश्र

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