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मेरे अल्फाज़

कितना आजाद हुए हैं हम....

rameshwar Mishra

75 कविताएं

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#AzadAlfaz

शहीदों की दी आजादी में देखो कितना आजाद हुए है हम

वहशी भेड़िए और दरिंदे जाने कितने शक्लों में आबाद हुए है हम


गलियों की चींखें सुनकर भी निर्लज्जों से आगे बढ़ गए

सच्चाई तो यह है जल्लादों से भी बढ़कर जल्लाद हुए है हम


वे वहां लहू से लथपथ सबके खातिर इंकलाब बोल गयें

मंजर यहां पर यह फैला केवल हिन्दू मुसलमान हुए है हम


जैसा हिन्दुस्तान बना है अब पहले तो वैसा न था

गंगा यमुना साथ लिए कभी इलाहाबाद हुए है हम
-राग रामेश्वर

रामेश्वर मिश्र

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