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ab tak chhal jari hai

मेरे अल्फाज़

बोलो हमें भला क्या मिल जाएगा

rameshwar Mishra

75 कविताएं

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ओ ! रामराज के अभिलाषी
बोलो हमें भला क्या मिल जाएगा

सब अपराधों के अपराधी
तथाकथित हम दोषी होंगे
हमसे ही छल होगा और
हम ही शापित पत्थर होंगे

चलो मान लिया शबरी को
प्रभु दर्शन मिल जाएगा
पर बोलो अहिल्या पर
लगा दाग क्या मिट जाएगा

हमें ही प्रतिक्षण देने होंगे
पवित्रता के कई प्रमाण
सीता पर फिर प्रश्न उठेंगे
फिर भी तौला जाएगा सम्मान

हमें नहीं लगता तब भी
अग्निपरीक्षा से छुटकारा मिल जाएगा
निर्णय अंतिम यह होगा
नगर से बाहर भेज दिया जाएगा

सीता उस युग भी छली गई
अब तक छल जारी है छल जारी है
हम भला क्या उम्मीद करें
जो राम राज की तैयारी है

- रामेश्वर मिश्र

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