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मेरे अल्फाज़

भारत माँ की पावन माटी

Ramesh chandra

24 कविताएं

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भारत माँ की पावन माटी

भारत माँ की पावन माटी में
हम सब जन्में, फ़िर पले - बढ़े
उस माटी की,"मान" सुरक्षा को
सब सजग, हौसले संग खड़े,

माटी ने उगले, हीरे - मोती
अन्न स्वर्ण सा, जड़ी, बनस्पति
नदियाँ, शिखर, झील,झरनों से
जीवन, जल, अमृत सा बरसे,

भाँति भाँति के फूल खिलाये
सुन्दर मीठे फल उपजाए
गुलशन, मधुबन, हरियाली संग
धरती माँ नित रूप सजाए,

भारत माँ की पावन माटी का
अब हर कर्ज़ चुकाना है
लाल हूँ इसका गर्व हमारा
अग्रदूत ही बन जाना है,

जब माटी हुई,आसीन माथ पर
उपजा अति अभिमान हृदय धर
भारत-माँ-माटी, रक्षण को
हम सब हैं बलिदान को तत्पर !
रमेश शुक्ल ~


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