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मेरे अल्फाज़

मैं पागल

Ram Mohan

19 कविताएं

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मैं पागल हूँ
मैं पागल
लिए गए दायित्व हित
हूँ स्वीकारता चैलेंज नित
बस
चाह है यही
कर सकूँ पूरा वचन
चल सकूँ सर्वजन-संग
और
कोई मुझसे रूठे न
न तुम, सेवा और न ही संगठन
पा सकूँ स्नेह-दुलार कर समन्वयन
चाहो तो लो मान
हूँ मैं पागल, अपनी सोंच के वास्ते
हूँ चाहता चलना सुपथ के रास्ते

- राम मोहन गुप्त 

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