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मेरे अल्फाज़

तस्वीर आपकी बोल रही है

Ram Kumar

27 कविताएं

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मुखड़ा चन्दा,
ह्रदय है गंगा,
होंठ गुलाबी,
ऑंखें काली;
भेद आपका खोल रही है,
मैं क्या बोलूँ?मुझसे पहले
तस्वीर आपकी बोल रही है।

कान का झुमका,
हार गले का,
माथ की बिंदिया,
न कोई कमियाँ;
भेद आपका खोल रही है,
मैं क्या बोलूँ?मुझसे पहले
तस्वीर आपकी बोल रही है।

रंग बादामी,
न कोई खामी;
खुशबू तेरी,
मानों चमेली;
भेद आपका खोल रही है,
मैं क्या बोलूँ?मुझसे पहले
तस्वीर आपकी बोल रही है।।


राम कुमार चन्द्रवंशी
बेलरगोंदी (छुरिया)
जिला-राजनांदगाँव
9179798316
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