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मेरे अल्फाज़

तुम अगर आये न होते

Ram Gopal

33 कविताएं

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तुम्हारी बेरुखी से दर्द नहीं होता हमें
जो तुम्हें लेकर सपने सजाये न होते
भावनाएं मन की, तुम जो समझ पाते
तो तुम्हारे लिए हम, पराये न होते
बिना बात के हंसना नहीं पड़ता हमें
जो विरह-पीड़ा दिल में छुपाये न होते
हमेशा के लिए बन्द कर लेते आंखें 
तुम्हें अगर इन में बसाए न होते
धडकनें भी बन्द हो जातीं कब की
यदि तुम इस दिल में समाये न होते
तुम से दूर इतने दिन कैसे रह पाते
यदि प्यार के दो पल चुराये न होते
आंखें पथराई सी निहारती ही रहतीं
लौट कर, "तुम अगर आये न होते"

- राम गोपाल

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