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मेरे अल्फाज़

प्रियतमा तुम बहुत याद आती हो

rakesh pandey

92 कविताएं

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....मै यादों का
किस्सा खोलूँ तो,
कुछ लोगो में तुम बहुत
याद आती हो ....

...मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ घाव बहुत
याद दिलाती हो ....
न जाने क्यों हनी तुम रोज रात
सपने में आकर जगाती हो

.तुम्हारे साथ गुजरे विवाहित पलों में
कुछ बातें थीं फूलों जैसी थी ,
....कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
....मै सोचता हूँ शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
....कुछ अपने ही सुंदर जीवन को
खा गए जो आज बहुत याद आते हैं.
सपने में जगाते हैं
राकेश पाण्डेय

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