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मेरे अल्फाज़

मौसम बदलने वाला है

Rakesh Kumar

3 कविताएं

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फिर से मौसम बदलने वाला है
दर्द अपना उभरने वाला है

आइने की तलाश में है वो
एक चेहरा सँवरने वाला है

तू भी ईमान बेच ही आया
कौन काँटों प चलने वाला है

तेरी महफ़िल ही बेलिबासों की
कौन क्या किसको कहने वाला है

एक मुद्दत से यार है अपना
वो ज़ुबाँ से मुकरने वाला है

रुख़ से चिलमन उठा रहे हैं वो
अपना दिल भी मचलने वाला है

अब ज़ुबाँ को सम्भालिये अपनी
सर से पानी गुज़रने वाला है....

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