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मेरे अल्फाज़

एक एहसास

rakesh kumar

7 कविताएं

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राकेश कुमार

तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|तुमको .........
1.
वह एक पल था|
जब स्कूल में साथ-साथ पढ़ा करते थे|
तुम abcd पढ़ती थी|
हम प्यार का पहाड़ा पढ़ते थे|
दो बेंच के एकओर किनारी पर बैठा करते थे|
जब गुरुजी तुमको मारते थे, तो हम रोया करते थे|
तुम प्रेम की ककहरा थी|
हम य र ल व का यार हुआ करते थे|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|तुमको .........
2.
जब स्कूल बन्द होता था|
इंतिजार खुलने को होता था|
गर्मी की छुटी भी एक वर्ष सा लगता था|
तुमको देखे बिना, जी मेरा न लगता था|
तुम्हारे गली में भी रोज फेरा लगता था|
दोस्तो के बीच बिन वजह डेरा लगता था|
तुम्हारी भाव खाना आज भी याद है|
तभी तो हम बर्बाद है|
एक जमाना था|
कभी हम तेरे प्यार में टाइटेनिक की तरह डूबा करते थे|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|तुमको.........
3.
तुमको तो अब जरा सा भी ख्याल नही आता होगा|
एक दूसरे पर कलम की स्याही छिड़का करते थे|
तुम्हारे प्रेम पत्र में भी हम अपना नाम दर्ज करते थे|
चोर सिपाही का खेल भी कितना अजीब था|
तुम राजा हुआ करती थी हम रंक हुआ करता था|
तुमको क्या पता
हम तेरी सलामती का, ईश्वर से फरियाद करते थे|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|तुमको.........
4.
तेरी मुस्कान जैसे टिमटिमाते तारे थे|
तुम्हारी चोटियों की गूँथन, गुलाब फूल हुआ करता था|
तुम्हारी आँख से आँसुओ का भी टपकना मोती का वर्षा हुआ करता था|
बचपन में हम
कभी आपकी माँ कभी मेरी माँ के आँचल में दोनों एक हुआ करते थे|
नोक झोंक खिंचा तानी बे बुनियाद किया करते थे|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|तुमको.........
5.
जब सयानी हो गई तुम|
रूप का रूहानी हो गई तुम|
पाबन्दी भी था, न हँसना था न रोना था|
केवल घुट-घुट कर जीना था|
पर दिल की बात तो watsup पर ही होना था|
तुमने DP ब्लाक कर दी जब मैसेज किया करते थे|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|तुमको.....
6.
तुमने एक पल में ठुकराई|
जिसकी वजह भी न बताई|
हम तनहा कितना|
कौन करेगा भरपाई|
वो चिराग तेरे प्यार के अंधड़ रह गई|
कभी जला, कभी बुझा, पर खाक बन गई|
ओह!
बचपन भी क्या खूब था, हँस-खेला करते थे|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|तुमको.....
7.
जाने कैसे तुमने अपने दिल को मनाई|
फक्र था मेरे प्यार पर फिर भी की जुदाई|
मैं अकेला जी लूँगा भाई|
क्योकि ,प्यार को कभी कमी महसूस न होने दिए बाबूजी और माई|
पर वो हवाओ का एक झोका था| जिसको आगोस में लिया करते थे|
तुमको एहसास नही हम कितना प्यार करते थे|
कल तक थोड़ा था, अब बेईतिहा .... किया करते है|तुमको.........

-राकेश कुमार
बक्सर, बिहार




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