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मेरे अल्फाज़

पिता

Rajveer Maurya

12 कविताएं

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जिनकी मेहनत की छाँव तले ,
परिवार समूचा पलता है ।

घर की खुशियों के खातिर तो ,
दिन रात मुसलसल चलता है ।

जिनकी मजबूत बाजुओं को ,
हम बना के झूला झूले हैं ।

जिनकी दौलत के बल पर हम ,
सब जिम्मेदारी भूले हैं ।

जो सारे कष्ट छुपा कर के ,
घर आते ही मुस्काते हैं ।

बच्चों की खुशी देख कर के,
जो भूल सभी गम जाते हैं ।

वो पिता हमारे जीवन मे ,
उस परमपिता से बढ़कर है ।

उनके बिन जीवन खारा है ,
शोहरत दौलत सब कमतर है ।

हैं धन्य सभी जिनके सिर पर ,
महफूज़ पिता का हाथ अभी ।

हैं धन्य सभी बेटे बेटी ,
जो हैं पापा के साथ अभी ।

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