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मेरे अल्फाज़

जहान वालोंं ने कहा

rajni singh

16 कविताएं

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घर से निकली थी यह सोच कर कि जी लूंगी इस जहान में,
घर से निकली थी यह सोच कर कि जी लूंगी इस जहान में ,
जहान वालों ने जीने न दिया l
तिनका भी न संभला इन हाथों से
टूट गए सारे सपने ,
बिखर गए सारे सपने,
जहान वालो ने कहा
जहान वालो ने कहा
तू जहाँ -जहाँ जाएँगी हम वहाँ-वहाँ आएँगे
तुझे जीने न देंगे तुझे जीने न देंगे
उड़ ले तुझे जितना उड़ना है,
उड़ ले तुझे जितना उड़ना है
तुझे उड़ने न देंगे तुझे उड़ने न देंगे
तू जहाँ -जहाँ जाएँगी हम वहाँ-वहाँ आएँगे
तुझे जीने न देंगे तुझे जीने न देंगे l

रजनी सिंह 

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