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मेरे अल्फाज़

लहरों से पूछो

Rajni Ray

36 कविताएं

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क्यों रहती है यूँ बेकरार बहती लहरों से
पूछो .....
क्यों है इसको साहिल को छूने की प्यास ....

क्यों है लहरों में आगे बढ़ने की आस ...
बहती लहरों से पूछो....


ना कोई अपना , ना कोई पराया ।
फिर भी हर किसी के दिल की है वो ठंडी छाया ....

हर लहरों में है क्यों सिर्फ प्यास ही प्यास
उस संगम से पूछों क्यों लगी रहती है मिलने की वो आस

हर बहती हवाओं के साथ ....
बहती लहरों से पूछो......

हर आती लहरों में है छुपी है ना जाने कितनी उमीदें ...
वो थकती नहीं है आपने जीवन में ....

चाहे आये कोई भी तूफान ।
हर आती लहरों से देती है वो जीने और
निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा ..

मेरा दिल करता है
हर लहरों को सलाम करूँ और उस लहरों पर कई सारें पैगाम लिखूँ .....

स्वरचित - गुलशन पाण्डेय
पंचायत शिक्षिका जोतैली ,मधेपुरा



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