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मेरे अल्फाज़

एक बार फिर से वो बचपन दिला दो

Rajni kapoor

23 कविताएं

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एक बार फिर से वो बचपन दिला दो
सपने बुनती आँखें , लड़ता दिल दिला दो
समाज की न पड़ी हो बेड़ियाँ जहाँ पे
आज़ाद नज़रों को वो मंज़र दिखा दो

एक बार फिर से वो बचपन दिला दो......

जब हाथों में हाथ डाले सड़कों पे घूमते थे
कागज़ की नाँव गड्ढे में छोड़ते थे
वो तितलियाँ के पंख किताबों में रखते थे
वही मासूमियत फिर से नज़रों को सीखा दो

एक बार फिर से वो बचपन दिला दो। .....

जहाँ पापा से डाट खाके मम्मी से बोलते थे
मम्मी से डाट खाके पापा से बोलते थे
दादी की कहानियां रातों को सुनते थे
गर्मी की छुट्टियां में नानी को ढूंढ़ते थे

वो दादी का प्यार एक बार दिला दो
नानी की कुल्फी का स्वाद फिर से चखा दो

एक बार फिर से वो बचपन दिला दो
सपने बुनती आँखें लड़ता दिल दिला दो

- रजनी कपूर

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