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मेरे अल्फाज़

पुरानी डायरी

Rajkumar Tiwari

138 कविताएं

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काश कोई ऐसी यहाँ, बरसात हो जाये
मेरा चमन फिर गूले-गुलज़ार हो जाये

ठोकरें खा लीं बहुत, जख़्म भी मिल गए
कोई मरहम दे दे इससे पहले, कि नासूर हो जाये

एक दिन साकी ने जाम को, इतना रुला दिया
कहा तुम रहो यही, तेरा नशा दूर हो जाये

- राज कुमार तिवारी *राजबाराबंकवी*

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