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Katilana Yahan Unka Andaz Hai

मेरे अल्फाज़

कातिलाना यहां उनका अंदाज है

Rajkumar Tiwari

47 कविताएं

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आज ऐसे यहां पर संवर वो रहे,
लाशें कहीं पे गिराऐगें ओ।
रवानी घटाओं में छाई हुई-
विजली कहीं पे गिराऐगें ओ।।
आज ऐसे यहां पर...

चाल से यूं लगा मोरनी जा रही,
सांपों की सामत है आने लगी।
आंख में हैं उनके कई मयकदे,
मदहोशी यहां कोई छाने लगी।।
ये दंपा सभी को जलायेगी अब-
किस महफिल में आग लगायेंगे ओ।।
आज ऐसे यहां पर...

इरादें कोई नेक लगते नही,
कातिलाना यहां उनका अंदाज है।
आजद जुल्फें हैं लहरा रही,
जंजीर किसी की बनी आज हैं।।
जुर्म कई आज वो कर जायेगें-
अदालत कहीं पे लगायेगें ओ।।
आज ऐसे यहां पर...

लुटेरे खुले आम चलते यहां,
जागीर बचाना है मुश्किल बडा।
दौलत भी सारी चली जायेगी,
मुफलिस बताना है मुश्किल बड़ा।।
दिलों के शहंशाह सबके हैं वो-
परचम कहीं लहरायेगें ओ।।
आज ऐसे यहां पर...

नकाबपोशों की अब ये दुनियां हुई,
दबदबा इन्ही का है कायम यहां।
कत्ल करते कई ये सरेआम हैं,
औ बनें है बडे़ ये मुलायम यहां।।
कई (राज) खीसे में रखतें है जो-
आईना सभी को दिखायेंगें ओ।।
आज ऐसे यहां पर...

राज कुमार तिवारी, राज

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