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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल, नारी तुम भी ....

rajkumar sharma

21 कविताएं

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सास बहु मां बहिन सुखी दादी हो।
औरतों को जीने कि आजादी हो ।

प्रेम तो बढ़ता है दुख बंटाने से
अंतरा में आत्मा भी सादी हो ।

खुन्नस पालोगे बिना संवाद तो
एक दूसरे के ही प्रतिवादी हो ।

इस विलास के विषय का विष बड़ा
मारता तड़फाता मन विषादी हो ।

लज्जा से सज्जित सुकोमल नारी हो
प्रेमाधार ना ही भौतिक वादी हो ।

कर्म से पुरुषत्व कर ना मर्म से
धर्म कि ना अन्यथा बर्बादी हो ।

है जगत का सार यदि पुरुषत्व तो
नारी तुम भी शक्ति सम अनादी हो।

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