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Ghazal Ke Vaste

मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल के वास्ते

rajinder goel

13 कविताएं

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बस्तियों से निकलो कुछ पल के वास्ते
वीरानों में बैठो कभी ग़ज़ल के वास्ते 
झूठ मक्कारी जरूरी है बहुत आज मगर
वफादारी भी थोड़ी सीख ही लो कल के वास्ते 
बसाओ शहर लगाओ शहर में फूल भी लेकिन
जमीन थोड़ी-बहुत छोड़ दो फसल के वास्ते 

- राजिन्द्र गोयल

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