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मेरे अल्फाज़

रिश्तों के आँगन में

Rajeshwari Joshi

25 कविताएं

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रिश्तों के आँगन में लगाएँ,

रिश्तों के आँगन में लगाएँ,
पौधा हम एक प्यार का,
महके जीवन के आँचल में,
जैसे फूल हरसिंगार का।

खुशियों के सारे पत्ते निकले,
दुःख ना हो जिसमें हार का।
सुख - दुःख चाहे कितने आये,
साथ हो अपने परिवार का।

नयी दिशाएँ बाँह फैलाए,
स्वागत करती बहार का।
अंधकार को हम मिटा कर,
फूल बने उजियार का।

नफरतों को क्यों हम बाँटे,
नस्लें बोये प्यार की,
कुछ अपनों के विश्वास की,
कुछ सपनों के संसार की।

तपते जीवन के रेगिस्तानों में,
वृक्ष बने हम छाँव का।
आओ पौधा एक लगाएँ,
कुछ अपने के प्यार का।

- राजेश्वरी जोशी,
उत्तराखंड

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