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मेरे अल्फाज़

माँ की कोख में

Rajeshwari Joshi

25 कविताएं

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माँ की कोख में

पापा इस प्यारी धरती पर,
मैं भी आना चाहती हूँ.
माँ की कोख में मत मारो,
मैं भी जीना चाहती हूँ.

दादी को समझा दो,
मैं भी जीना चाहती हूँ।
सपनों की कलियों को,
मैं भी चुनना चाहती हूँ।

माँ के आँचल से लिपटकर,
मैं भी सोना चाहती हूँ.
तेरी गोदी में बैठी तुझको,
पापा कहना चाहती हूँ.

तेरी ऊँगली पकड़ ठुमककर,
मैं भी चलना चाहती हूँ.
हवाओं सी अंगना में तेरी,
मैं भी बहना चाहती हूँ.

चिड़िया सी घर आंगन में,
खूब फुदकना चाहती हूँ.
तेरी बगिया की फूल बनकर,
खूब महकना चाहती हूँ.

कुलदीपक बन जग में तेरा ,
नाम रोशन करना चाहती हूँ.
बुढ़ापे की लाठी बनकर,
तेरी सेवा करना चाहती हूँ.

पापा मुझको मत मारो,
मैं भी जीना चाहती हूँ.
सुंदर सी तेरी बिटिया बनकर,
तुझको पापा कहना चाहती हूँ.

माँ की कोख में मुझको मत मारो,
मैं भी संसार में आना चाहती हूँ
इस सुदंर सी दुनिया में आकर,
मैं भी हँसना चाहती हूँ.

- राजेश्वरी जोशी,
उत्तराखंड

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