आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Beti hun to kya hua

मेरे अल्फाज़

बेटी हूँ तो क्या...

Rajeshwari Joshi

25 कविताएं

461 Views
बेटी हूँ तो क्या हुआ

मत रोको मुझको तुम अब,
मुट्ठी में आसमान भरने दो.
बेटी हूँ तो क्या हुआ मैं,
मुझको भी अब जीने दो।

लड़कों सा मुझे भी अब तुम,
जीवन में आगे बढ़ने दो।
बेटा - बेटी में कोई फर्क नही,
मुझको भी अब पढ़ने दो।

ऐवरेस्ट की ऊँची चोटी को,
मुझको अब तुम छूने दो.
समुद्र तल की अतल गहराई में,
मुझको अब तुम खोने दो.

झर- झर बहते मेरे भावों को,
निर्बाध गति से बहने दो.
फूल, पत्ती, नदी, पर्वत से,
मुझको बातें करने दो.

मिट्टी की सौंधी खूशबू को,
मेरी सांसों में बसने दो.
बांसती इस मधुर हवा को,
अब बाँहों में भरने दो.

मत बाँधो जंजीर पाँव में,
मुक्त गगन में उड़ने दो.
मेरे सारे सपनों को अब,
मुझको पूरा करने दो.

देवी दासी नही हूँ मैं,
इंसान ही मुझको रहने दो.
बेटी हूँ तो क्या हुआ मैं,
मुझको भी अब जीने दो.

- राजेश्वरी जोशी,
उत्तराखंड

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!