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मेरे अल्फाज़

बात दिल की

Rajeshwari Joshi

25 कविताएं

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बात दिल की वो, जुबां तक लाने लगे हैं,
हाल दिल का अब हमें, सुनाने लगे हैं।

मन के राज अब हमें, वो बतलाने लगे हैं,
आजकल कभी- कभी, वो मुस्कुराने लगे हैं।

जिंदगी के फलसफ़े, हमको समझ आने लगे हैं,
वो खफा हो गये, हम उनको मनाने लगे हैं।

सदियों के रूठे थे जो, अब पास आने लगे हैं,
कभी- कभी हमको भी, पास बुलाने लगे हैं।

ख्वाब पलकों में, अब हम सजाने लगे हैं,
नींदों में हमारी जबसे, वो आने लगे हैं।

जो लोग हमें दुश्मन , समझ झिड़क देते थे,
अब वो भी हमको, गले से लगाने लगे हैं ।

- राजेश्वरी जोशी
  उत्तराखंड


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