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मेरे अल्फाज़

ग़मों की बारिश

rajesh soni

3 कविताएं

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बरसेंगे कभी जब ग़म ना संभाल पाएंगे
लाख होगी तेरी कमी फिर भी मुस्कुराएंगे

तू बहता दरिया सा 
मैं ठहरा साहिल
टूटना बाकी है
फिर हो जायेंगे तुझमे शामिल

कभी बरसेंगे बूंदों में 
कभी अधूरे नींदों में
कभी इस आस में की फिर बारिश हो 

तेरी बातों की
तेरे सवालों की
मेरे लिए आये तेरे ज़हन में ख्यालों की 

मैं आज भी वहीँ बिखरा हूँ 
जहाँ तूने साथ छोड़ा था
कुछ और था 
शायद 
या प्यार थोडा था 

वक्त आज भी तेरे हिस्से का तुझपे ही खत्म होता है 
पहले आँखें हँसती थी पर अब ये कम होता है

तुझसे दूरी मंज़ूर है मुझे ये मीलों की
बस तेरे नाराज़गी से गम होता है 

- राजेश सोनी

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