आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   ujjwal

मेरे अल्फाज़

उज्ज्वल

rajesh mishra

11 कविताएं

98 Views
न सीमा पर तकरार हो, न हो कोई कलकल 
साम्य हों अधिकार सबके, जैसे बहता गंगा जल 
साम्प्रदायिकता का विनाश हो, बनें सभी सरल 
धर्मनिरपेक्षता गुंजित हो, बहे अविराम अविरल

सहिष्णुता प्रस्फुटित हो, नित निधान रहे हर अंचल
सद्भावना प्रलम्बन हो, मेघ पूरित हों बदल
अभिव्यक्ति की आजादी हो, न कोई उगले गरल
हरितमा से सुसज्जित भूखंड हो, गूंजे ध्वनि कुंजल

अनेकता में एकता हो, राष्ट्र प्रेम बहे प्रतिपल
भेदभाव का अंत हो, हर मानव बने प्रांजल
हिंसा का विनाश हो, भाई चारा उमड़े प्रब
शांतिभाव व्यापित हो, रहें सभी सामल

वसुंधरा में गुण गान हो, राष्ट्र रहे अव्वल
देश कल्याण में समर्पण हो, भक्ति रहे निश्छल
राष्ट्र निर्माण समृद्ध हो, करें दिए प्रज्जवल
नव भारत प्रफुल्लित हो, बनाएँ भविष्य उज्ज्वल

राजेश मिश्रा
कोरबा (छ. ग.)

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!