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मेरे अल्फाज़

रक्षाबन्धन

rajesh mishra

11 कविताएं

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थाल में सजाकर रोली, हल्दी, कुमकुम और चंदन
बहन भाई की कलाई में बांध देती रेशम की डोरी का बंधन
दिये जलाकर आरती उतारती और खिलाती मीठा अन्न
श्रावण पूर्णिमा के दिन जब जब आता रक्षाबंधन

भूल जाते सारे लड़ाई झगड़े, मनमुटाव और अनबन
हर्ष उल्लास के साथ यह पर्व मनाते मिलाकर मन से मन
भाई बहन को उपहार देता और रक्षा का देता वचन
श्रावण पूर्णिमा के दिन जब जब आता रक्षाबंधन

भाई बहन के प्यार का प्रतीक है यह रक्षाबंधन
खुशियों का त्यौहार है जिसमें दिखता अपनापन
श्रीकृष्ण के घायल उंगली पर द्रौपदी के साड़ी खंड लपेटकर हुआ था इसका सृजन
श्रावण पूर्णिमा के दिन जब जब आता रक्षाबंधन

राजेश मिश्रा
कोरबा (छ. ग.)

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