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Bete ki Kashmkash

मेरे अल्फाज़

बेटे की कशमकश

Rajendra Singh

45 कविताएं

319 Views
तुमने जीवन दिया
उसने जीना सिखाया
तू मां है
वो ममता है
तू दिल है
वो धड़कन है
कैसे कह दूं
तुम सही या वो गलत

तुमने गोद में खिलाया
उसने दिल में बसाया
दोनों ही ने
प्रेम में नहलाया

खुशबू तेरी
दिल में बसी
वो उस
खुशबू में रची
कैसे कह दूं
कौन ज्यादा हसीं?

तेरे बिना जीवन कहां
उसके बिना मृत्यु कहां
दोनों हों मेरे
जीवन के पूरक
कहां है प्रश्न
एकाधिकार का ?

जिव्हा तुम हो
स्वाद वो है
दृष्टि तुम हो
दिखती वो है
कर्ण तुम हो
श्रवण वो है
मेरे जीवन का
अहसास तुम्ही हो
फिर क्यूं कह दूं
तुम सही या वो गलत ।।

- प्रभात

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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