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मेरे अल्फाज़

अकेला छोड़ गए वो

Rajendra Prasad

4 कविताएं

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अकेला छोड़ गये वो मेरा दिल तोड़ गये वो,
हमसे वो दूर बड़ी दूर बड़ी दूर हो गये।............2
नींद आती नही याद जाती नही
दिल परेशान है बात होती नही।
करके गुमनाम हमको .......2
खुद तो मशहूर हो गये।
अकेला छोड़ गए वो..........२
कभी वो साकी बनकर अधरों का जाम देती।
कदम मेरे भटकते लिपट कर थाम लेती।
आज दौलत में नहाकर...2
वो बड़ी मग़रूर हो गये।
अकेला छोड़ गए वो..........2
जिस्म उनका धरा था गगन बन मैं पड़ा था।
होंठ उनके लरज़ते दिल में तूफ़ान भरा था।
दिया जो ठोकर उसने तो....2
सपने चूर चूर हो गये।
अकेला छोड़ गए वो मेरा दिल तोड़ गये वो
हमसे वो दूर बड़ी दूर बड़ी दूर हो गये.........2
राज

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