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मेरे अल्फाज़

देखेंगे

Raj Kumar

27 कविताएं

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हम खुद को बदल के देखेंगे
इधर से अगर नजरें घुमा ली आपने
हम उधर से देखेंगे
जुल्फें जो आ गईं चेहरे पे
हम अदा से झटक के देखेंगे
लकीर के फकीर से क्या चलते रहना
हम नई रहगुजर से गुजर के देखेंगे
जिस तरह बच्चे महफूज हैं माँ बाप की गोद में
हम नदी में लहरों सा उछल के देखेंगे
राज, यूँ तो सब खुशियां हासिल हैं
जिंदगी की दहलीज पर
किसी का दुःख दर्द जानने की खातिर
हम पांव में कांटे चुभो के देखेंगे

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