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मेरे अल्फाज़

अंधेरे

Raj Kumar

27 कविताएं

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मेरी सोच अभी मुझ तक है
सबको बताना ठीक नहीं

मेरी प्यास बहुत छोटी है
समुन्दर को बताना ठीक नहीं

रहने दे अभी आँखों का भरम
इतनी जल्दी राज से पर्दा उठाना ठीक नहीं

ताल्लुक टुकड़े होकर बिखर गए हैं राहों में
बड़ी तपिश हैं इन टुकड़ों में इन्हें गले लगाना ठीक नहीं

तारे जब गर्दिश में होंगे फिर देखा जायेगा
राज, अभी अंधेरों से घबराना ठीक नहीं

- राज कुमार कपूर

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