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मेरे अल्फाज़

फिर देखो किसी ने आवाज दी है मुझे

Raj Kapoor

21 कविताएं

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चलते चलते कोई सफर में रोकता है मुझे
राज फिर देखो किसी ने आवाज दी है मुझे

कोई उम्मीद का दर खोल दे मेरे लिए
राज जिंदगी का फलसफा बोझ है मेरे लिए

हवा उड़ा के लाई है बादल गरज रहें हैं अभी
राज खामोश है धूप शायद सूरज नींद में है अभी

जहां भी रहे हम देखो अपनी यादों का सिलसिला छोड़ आये है
राज पेड़ों पर देखो सुबह के गए पक्षी शाम को घर लौट आये हैं

किसी पर भरोसा नहीं रहा जमाने में
राज लोग गिरा भी देते है उठाने में

कुछ देर फकीरों की सोहबत में बैठो
राज अमीरी का नशा उतर जाएगा

तेरा जिक्र किसी जुबान पे हो
राज हमें मंजूर नहीं है खुदा के लिए
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