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मेरे अल्फाज़

तुम जब आये

rahul kumar

21 कविताएं

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तुम आये
बादल सा छाये
ठहरा पानी मन था मेरा
तुम उसमे हलचल सी लाये
तुम जब आये

जाने किन किन गलियों में
मैं अब तक भटका करता था
अनसुलझे सपनो में ही बस
उलझा उलझा रहता था
राह नई पाई मैंने
तुम जब मंजिल बन कर आये
तुम जब आये

--------- राहुल कुमार' अनपढ़'


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