जीवन क्या है

                
                                                             
                            "जीवन क्या है"
                                                                     
                            
जीवन एक ऐसा पल है, जिसे ईश्वर का वरदान कहूँ,
जो मिला जिसे अच्छे कर्मों से, खुद ईश्वर की ही जान कहूँ।
जीवन तो एक दरिया सा है, जहाँ ऊँची- नीची धार बनी,
कभी बना गंगाजल सा यह, कभी संघर्षो का सार बनी।
जीवन क्या है , क्या जीवन है बस इतना ही बखान करूँ।।
जीवन तो कितनी यादों का बस एक बहता झरना है,
न चोट और न दर्द का डर बस आगे बढ़ते रहना है।
जीवन तो एक मधुर गीत है जो सात स्वरों का मेल बना,
कहीं उगता और ढलता सूरज कहीं बच्चों का यह खेल बना।
जीवन क्या है , क्या जीवन है बस इतना ही बखान करूँ।।
जीवन तो है भाग्य मनुष्य का जो खुद को चुनौती देता है,
इसके बदले में ना जाने कितनी कठिन परीक्षा लेता है।
जीवन तो एक पुष्प हार है जो कितनों के गलों में पड़ता है,
मिलकर पुष्प से पुष्प वहीं वो मन को सुशोभित करता है।
जीवन क्या है , क्या जीवन है बस इतना ही बखान करूँ।।
जीवन तो है एक ऐसी राह जहाँ भाँति-भाँति के लोग मिले,
कुछ रहे अडिग कुछ गए पिघल, कुछ संघर्षो का भोग मिले। जीवन तो एक है तलाश जिसे कोई खोज ना पाया है,
थककर वो हार गया फिर भी आगे ही कदम बढ़ाया है।
जीवन क्या है , क्या जीवन है बस इतना ही बखान करूँ।।
जो समझ गया वो खेल गया जो न समझा वो झेल गया जीवन तो एक चौसर है,
सच्चे शब्दों में एक बात कहूँ जीवन तो बस एक अवसर है।
लेखक : राघवेंद्र सिंह


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2 years ago

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