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मेरे अल्फाज़

जब वो शेर गीदड़ों से टकराया होगा....

radhe singh

25 कविताएं

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जब वो शेर गिदड़ों से टकराया होगा

उसके एक दहाड़ से दुश्मनों की धमनियां थम गयी होगी,
उसके एक प्रहार से जाने कितनों की सांसें रुक गयी होंगी,
उसके विध्वंसक काल स्वरूप में कितनों को मौत नज़र आयी होगी,

जरूर वो रौद्र रूप दुश्मनों पर मौत बनकर छाया होगा,
जब वो शेर गिदड़ों से टकराया होगा।

धरा पे गिरकर भी उसकी शख्सियत हमराज सी रही होगी,
मुस्कुराता चेहरा और दिल में मातृभूमि के क़र्ज़ चुकाने की जज्बात सी रही होगी,
शिथिल शरीर की खुली आंखें जरूर दुश्मनों को भयक्रांत कर रही होगी,

तभी आंखें निकल कायर खुद पे शरमाया होगा,
जब वो शेर गिदड़ों से टकराया होगा।

तिरंगे में लिपटे अदम्भ्य साहस पर माँ की करुणा आँखों में उतर आयी होगी,
पिता की फफक फक्र से हाथों के रास्ते ललाट पे लहराई होगी,
पत्नी रोते हुए इस अद्वितीय पल को समेटने को आँचल फैलाई होगी,
बिटिया पास आकर धीरे से उठ जाओ पापा ये आवाज़ लगायी होगी,
जिन्दा रहे वीर और वीरता धरा और आसमां ने साथ आवाज़ लगायी होगी,

कायरों की कायरता पर, हर आँखों में खून उतर आया होगा,
जब वो शेर गिदड़ों से टकराया होगा।
 

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