विजयपथ

                
                                                             
                            चल रहा हूं विजयपथ पर
                                                                     
                            
हजारों ख्वाहिशें लेकर,
लाखों काटें बिछे हैं पथ पर
चल रहा हूं निडर होकर,
जग को आईना दिखाने
निकल पड़ा मैं विजयपथ पर।
अंधकार से भरें जग में
आया हूं ज्ञान का दीपक बनकर,
कुप्रथाओं की बेड़ियों को तोड़ने
आया हूं मसीहा बनकर,
प्रत्येक मनुज को सम्मान दिलाने
निकल पड़ा मैं विजयपथ पर।
धर्म की जंजीरों को तार तार करने
आया हूं तूफान बनकर,
नेताओं के झूठे वादों की शख्सियत से रूबरू कराने
आया हूं कालचक्र बनकर,
जग को सही राह दिखाने
निकल पड़ा मैं विजयपथ पर
मानवता को जगाने
निकल पड़ा मैं विजयपथ पर।


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8 months ago
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