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मेरे अल्फाज़

कोरोना तेरी खैर नहीं!

R Kumar

9 कविताएं

आए हो तो जाओ भी, हमको किसी से बैर नहीं।
ओ कोरोना उत्पात मचाओ ना, वरना तेरी खैर नहीं।
पड़ोसी देश के रहने वाले,हम अतिथि देवो भव कहते हैं,
जो बरबाद करे सके तू देश हमारा, इतना तुझमें जहर नहीं।

ओ कोरोना तेरी खैर नहीं।।

जान लेकर मासूमों की, कौन सा अच्छा काम किया है।
जिस देश में जन्मा तू उसी देश को बदनाम किया है।
चीन, इटली, और अमेरिका, माना कि तुझसे डर गए,
मगर भारत में डर दिखलाया तो, कर देंगे तुझे ढेर यहीं।

ओ कोरोना तेरी खैर नहीं।।

करू तारीफ एक बार तो,जो काम किया नेक है।
इस जंग में हिन्दू मुस्लिम भाई भाई, सब एक हैं।
सिक्ख, ईसाई भी अपने भाई, लड़ने को है साथ खड़े,
अब सिर्फ पराया तू ही, यहां पर कोई गैर नहीं।

ओ कोरोना तेरी खैर नहीं।।


बैठ गए हम अपने घर में,ना समझ कि तुझसे डरते हैं।
बिना शस्त्र के तेरा खात्मा, देख जरा कैसे करते हैं।
बजाकर ताली,बजाकर थाली, हम उनका अभिनंदन करते हैं,
इस महामारी के वक्त में, जिनका आराम करने का पहर नहीं।

ओ कोरोना तेरी खैर नहीं।
जो बरबाद करे सके तू देश हमारा,इतना तुझमें जहर नहीं।
ओ कोरोना तेरी खैर नहीं।।


रोहित ठाकुर
बुलंदशहर


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