अब ये सहर न हो तो अच्छा

                
                                                             
                            अब ये सहर न हो तो अच्छा
                                                                     
                            
पर्दाफाश गमों का न हो तो अच्छा

धड़कनों पर रहा न अब इख्तियार
लहू रगों में अब जम जाए तो अच्छा

थक गया हूं मरहम लगाकर ज़ख्मों पर
घाव अब ये नासूर हो जाए तो अच्छा

अश्कों का बोझ उठा नहीं सकती पलकें
येआंखें अब खुश्क हो जाए तो अच्छा

फलक पर सितारों की दोस्ती लगी है अच्छी
ज़मी से अब ये रिश्ता टूट जाए तो अच्छा
 
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2 months ago

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