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मेरे अल्फाज़

मुक्तक

Pushpendra Kumar Sharma

2 कविताएं

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देखकर के मुझे जब से वो हैं हंसे
प्रेम के भाव दिल में हैं तब से जागे
बताए हमें कोई उनको क्या अर्पण करें
जिसको रख ले सदा वो मना ना करे

बात ही बात में वो तो हैरान ..हुए
पढ़ के ख़त को मेरे वो परेशान हुए
बात कोई तो थी जो न अच्छी लगी
बात कोई तो मैं थी सच्ची ..लिखी

नाम - पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा
पता - मोह० आनन्द वाटिका
पुवायां (शाहजहांपुर)


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