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मेरे अल्फाज़

क्षण भर का भी ज्ञान न आया

Professor Ravindra Pratap Singh

74 कविताएं

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क्षण भर का भी ज्ञान न आया

नागिन नृत्य करे पहलू में
क्षण भर का भी ज्ञान न आया
हर लय पर था उसका बदला
हम सीधे मन जान न पाये।

मृगतृष्णा दे दे दौड़ाती
विष में जल का भान कराती
नाज़ नाज़ में लहरा लहरा
नाच दिखाती,नाच दिखाती।

एक सपेरा भी है उलझा
वो भी क्या करता बेचारा
उसके संग वो बंधा नियति में
सीधा फिरता मारा मारा।

कहती नागिन दूर देश में
लेकिन छम छम नचा करती
नहीं देखती उसे व्यवस्था
नागिन है, कुछ जादू करती ।



प्रो रवीन्द्र प्रताप सिंह


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