आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Tumhen main pyara sa geet likhta hun

मेरे अल्फाज़

तुम्हें मैंं प्यारा सा गीत लिखता हूंं

prem shanker

53 कविताएं

97 Views
तुम्हें मैं एक प्यारा सा गीत लिखता हूं।
तुम्हारे लिए आज सुनहरी प्रीत लिखता हूं।।

ये सुहानी हवा दुआ कर रही हैं तुम्हारे लिए।
सबकी ओर से मैं तुम्हें एक मीत लिखता हूं।।

आकाश का चमकता चांद इतराने लगा है मुझ पर।
इनको बता दूं कि मैं प्रेम की ही जीत लिखता हूं।।

आधुनिक युग ने परंपराओं का खंडन कर दिया।
पर आज मैं तुम्हारे लिए नई नई रीत लिखता हूं।।

आज भी लोग डरा धमकाकर निकाल रहे हैं काम।
पर मैं कभी नहीं किसी को कोई भीत लिखता हूं।।

रे कलरव भी सूना सूना है प्रेम के गीत बिन।
लेकिन तुम्हें मैं प्यारा सा गीत लिखता हूं।।
~ प्रेम शंकर
जय हिन्द जय भारत।। 


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!