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मेरे अल्फाज़

प्रेम-गणित

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सपनों की होली,.
हसरतों की डोली.

अश्कों की वैतरणी,
स्मृतियों की पूंजी.

गमगीन अन्धेरे,
वीरान सवेरे.

मध्यम होते चिराग,
बूझते हूए दीये
और गहराता एकान्त .

तेरे प्रेम मिलन के
योग वियोग
के गणित का
क्या यही
गूणाकं, शेषांक था ?

-- नरेन्द्र डंग

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