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मेरे अल्फाज़

बेगानी सी दुनिया

Preeti Saxena

1 कविता

168 Views
कल भी शायद जाएगा धीरे धीरे टल,
सोचो ज़रा गौर से, क्या किया इस पल
इस बेगानी सी दुनिया में, किसे कहें हम “अपना है”
साथ कभी हमने खुद का, और कभी सफर ने छोड़ा है”


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