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मेरे अल्फाज़

बूँद ............

Praveen Pratap

23 कविताएं

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''बूँद ''

मैं हूँ एक बूँद ,
सावन के बारिश की ,किसानों की आशाओं की ,
मैं हूँ एक बूँद ,
पेड़ों की पत्तियों पर गिरी हुई ओस की मोती सी ,
मैं हूँ एक बूँद ,
झरनों की धाराओं से गिरती हुई कल -कल की आवाज़ों सी ,
मैं हूँ एक बूँद ,
मानव की आँखों से दर्द और ख़ुशी के आँसुओं से गिरती हुई ,
मैं हूँ एक बूँद ,
माँ के दूध से बच्चे की भूख़ को तृप्ति करती हुई ,
मैं हूँ एक बूँद ,
प्यासे जीव के प्यास बुझाती जल के धार की ,
मैं हूँ एक बूँद ,
रेगिस्तान की ग़र्मी में पानी की आशा की ,
मैं हूँ एक बूँद ,
बारिश के पानी से धरा को सींचती ,
मैं हूँ एक बूँद ,
नदियों के धारों से चलती हुई किनारों पर मिलती ,
मैं हूँ एक बूँद ,
एक धारा से टूटती अपने अस्तित्व को ढूंढ़ती ,
मैं हूँ एक बूँद 

प्रवीण प्रताप
गोरखपुर
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